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मैं तुमको याद आना चाहता हूँ

  मैं तुमको ये बताना चाहता हूँ मैं तुमसे दूर जाना चाहता हूँ यूँ हिज्र में किसी कमी की तरह मैं तुमको याद आना चाहता हूँ तेरे लिए धड़क रहा मेरा दिल मैं इसका मेहनताना चाहता हूँ जब तेरे गीत गुनगुनाता हूँ मैं लर्ज़ीशे दाना दाना चाहता हूँ हो प्यार दिल में तेरे दिल में मेरे मैं ऐसा आशियाना चाहता हूँ तुम मेरे हो के तुम मेरे ही तो हो फिर भी मैं तुमको पाना चाहता हूँ

सब

समझने की जो बातें थी उन्हें मैं बद समझ बैठा  जो गिरहन का अँधेरा था उसे मैं शब् समझ बैठा  पहन कर मुस्कराहट सब यहाँ बाहर निकलते हैं  मैं बाज़ारू तवज्जोः को लिहा ज़ो दब समझ बैठा  उन्हें कहना उन्हें सुनना बड़ा पेचीदा लगता है  के उनकी बात नाहक़ ही मैं कब से सच समझ बैठा  वो माली का जो बेटा है बड़ा नादान बच्चा है  जिसे देखा बड़ी गाड़ी में बस साहब समझ बैठा यही मैं सोचता हूँ के कहाँ और कब समझ बैठा  बना कर के मशीनें खुद को इंसां रब समझ बैठा   बड़े नुस्खे नहीं थे ज़िन्दगी में कामयाबी के बड़ी छोटी सी ख्वाहिश थी जिसे मैं सब समझ बैठा

गुमशुदा

पूछता था किसी से कल कोई  क्या है आखिर ये मेहरबाँ होना  दिल ने तस्वीर ये तसव्वुर की माँ के पल्लू का आसमाँ होना  प्यार की गुफ़्तगू में है मुमकिन  चंद लफ़्ज़ों का पास ना होना  उनसे मिलने के ऐन मौक़े पर  खुद जुबां का ही बेज़ुबाँ होना    मुल्क बनते हैं जो बिगड़ने से  उनका बेहतर है ख़ात्मा होना  क्या ये सोचा भी है कभी तुमने  कैसा लगता है बे मकाँ होना  जाओ एक बार आइना देखो  छोड़ दो खुद से बे इमां होना  कैसे मंज़ूर है तुझे ऐसे  दौड़ते खून का थमा होना    एक ज़रिया है ध्यान का ये भी   जिस्म से इस तरह जुदा होना  डूबना है तुझे ख़यालों में  जैसे शायर का गुमशुदा होना