गुमशुदा

पूछता था किसी से कल कोई 
क्या है आखिर ये मेहरबाँ होना 
दिल ने तस्वीर ये तसव्वुर की
माँ के पल्लू का आसमाँ होना 

प्यार की गुफ़्तगू में है मुमकिन 
चंद लफ़्ज़ों का पास ना होना 
उनसे मिलने के ऐन मौक़े पर 
खुद जुबां का ही बेज़ुबाँ होना 
 
मुल्क बनते हैं जो बिगड़ने से 
उनका बेहतर है ख़ात्मा होना 
क्या ये सोचा भी है कभी तुमने 
कैसा लगता है बे मकाँ होना 

जाओ एक बार आइना देखो 
छोड़ दो खुद से बे इमां होना 
कैसे मंज़ूर है तुझे ऐसे 
दौड़ते खून का थमा होना 
 
एक ज़रिया है ध्यान का ये भी  
जिस्म से इस तरह जुदा होना 
डूबना है तुझे ख़यालों में 
जैसे शायर का गुमशुदा होना


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